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दिल्ली के रामलीला मैदान में आज विपक्ष की रैली, बिना अनुमति मार्च की योजना से पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

01 Nov, 2026 10:15 AM

नई दिल्ली, 1 नवंबर: राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में आज होने वाली विपक्ष की रैली से पहले सुरक्षा व्यवस्था और प्रस्तावित मार्च को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी सांसदों ने रैली से पहले कांस्टीट्यूशन क्लब में एकत्र होने और वहां से मिंटो रोड होते हुए रामलीला मैदान तक मार्च निकालने की योजना बनाई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक रैली के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी गई है।

जानकारी के अनुसार, विपक्ष के सभी सांसद पहले कांस्टीट्यूशन क्लब में जमा होंगे। इसके बाद बसों के जरिए मिंटो रोड पहुंचेंगे और वहां से पैदल मार्च करते हुए रामलीला मैदान जाएंगे।

रैली की अनुमति, लेकिन मार्च के लिए नहीं

दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों की ओर से रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी, जिसे मंजूरी दे दी गई है। इसी के अनुसार रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

हालांकि, मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च निकालने के लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं मांगी गई है। ऐसे में प्रस्तावित मार्च के रास्ते पर अलग से सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।

बिना अनुमति मार्च हुआ तो क्या बनेगी स्थिति?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विपक्षी नेता बिना अनुमति मार्च निकालते हैं तो क्या दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच किसी तरह का गतिरोध पैदा हो सकता है?

विपक्ष की ओर से रैली में शामिल होने के लिए लाखों लोगों को दिल्ली बुलाने का ऐलान किया गया है। ऐसे में यदि बड़े विपक्षी नेताओं के साथ हजारों या लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरते हैं, तो भीड़ को नियंत्रित करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

बड़े नेताओं की सुरक्षा भी चुनौती

दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में तैनाती रामलीला मैदान और उसके आसपास की गई है। सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से रैली को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

ऐसे में यदि विपक्षी सांसद मिंटो रोड से पैदल मार्च करते हैं और बड़ी संख्या में समर्थक भी उनके साथ शामिल हो जाते हैं, तो यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और प्रमुख नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस क्या रुख अपनाती है और विपक्षी नेता अपनी योजना के अनुसार मार्च निकालते हैं या नहीं।

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